छोड़ दे माँ - बाप को किसी के लिए ?
7:45 AM | Posted by
V.P. Singh Rajput
छोड़ दे माँ - बाप को किसी के लिए
यह मुनासिब नहीं आदमी के लिए
प्यार से भी ज़रूरी कई कम हैं
प्यार सब कुछ नहीं ज़िन्दगी के लिए
छोड़ दे माँ - बाप को किसी के लिए !
बात में जो कहता हु फसना नही हकीकत हैं
माँ बाप चाहे केसे भी हो माँ बाप के चरणों में जनत हैं
सिर्फ पत्नी के लिए माँ बाप को छोड़ा,
रास्ता छोड़ कर जनत का जहनम में ना जा
आपने माँ बाब का दिल ना दुखाना किसी के लिए !
चारो धाम मिलता नहीं सबको संसार में
माँ -बाब के चरणों मैं ही तो चारो धाम हैं
छोड़ दे माँ - बाप को किसी के लिए
यह मुनासिब नहीं आदमी के लिए !
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